हमें हरदम हर पल कुछ न कुछ सीखते रहना चाहिए । जिस दिन सीखने का क्रम टूट जाता है उसी दिन से हमारे जीवन का उत्थान रुक जाता है । प्रकृति का नियम है कि संसार में सभी चीजों का पहले उद्गम फिर उत्थान और अंत में पतन होता है । परंतु, यह केवल भौतिक अथवा शारीरिक रूपों पर लागू होता है और मनुष्य का एक अद्वितीय पहलू है इसकी बौद्धिकता । मनुष्य की बौद्धिकता में यह नियम कतई लागू नहीं होता है । मनुष्य बौद्धिक रूप से निरंतर जीवनपर्यंत अपना उत्थान करते रह सकता है । अतः हमें सदैव स्वयं को परिष्कृत करते रहना चाहिए । नई नई चीजों को सीखते रहना चाहिए । हर दिन एक नए इंसान के रूप में खुद को परिष्कृत करते रहना चाहिए और यही हम सबका अंतिम ध्येय भी होना चाहिए ।
अपना फ़र्ज &&& @@@@ वसंत कुंज सोसाइटी में कृष्णजन्माष्टमी के अवसर पर एक भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया था। जिसमें मशहूर गायक अभिनव चंचल आ रहे थे। हर जगह उनका पोस्टर लगा दिया गया था। अभिनव चंचल गायन के क्षेत्र में एक नामी गरामी हस्ती माना जाता है। भक्ति संगीत के साथ साथ उन्होंने बॉलीवुड के कई प्रसिद्ध फिल्मी गानों में भी अपना स्वर दे चुका है। एक ओर युवावर्ग उनके फिल्मी गानों के मुरीद हैं तो वहीं दूसरी ओर उनके धार्मिक गीतों और भजनों ने वैसे लोगों को मंत्र – मुग्ध कर रखा है , जो जरा आध्यात्मिक किस्म के हैं। इसमें बच्चे से लेकर वृद्ध वर्ग तक के लोग शामिल हैं । रत्नावली आज तड़के सुबह उठ गई और नहा धोकर पूजा में बैठ गई । दामोदर प्रसाद को भी नींद नहीं आ रही थी किंतु, फिर भी बिस्तर पकड़े हुए थे । दो-चार दिनों से उनके घुटनों का दर्द जरा बढ़-सा गया था, और अन्दर ही अन्दर हल्की कंपकपी का अनुभव हो रहा था । थोड़ा चल फिर लेता तो सांस फूलने लगती । इसकी वजह कोई खास बीमारी तो नहीं थी किंतु, सबसे बड़ी बीमारी उसका बुढ़ापा था । दामोदर प्रसाद बहत्तर साल के हो चुके हैं, ज...
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