हमें हरदम हर पल कुछ न कुछ सीखते रहना चाहिए । जिस दिन सीखने का क्रम टूट जाता है उसी दिन से हमारे जीवन का उत्थान रुक जाता है । प्रकृति का नियम है कि संसार में सभी चीजों का पहले उद्गम फिर उत्थान और अंत में पतन होता है । परंतु, यह केवल भौतिक अथवा शारीरिक रूपों पर लागू होता है और मनुष्य का एक अद्वितीय पहलू है इसकी बौद्धिकता । मनुष्य की बौद्धिकता में यह नियम कतई लागू नहीं होता है । मनुष्य बौद्धिक रूप से निरंतर जीवनपर्यंत अपना उत्थान करते रह सकता है । अतः हमें सदैव स्वयं को परिष्कृत करते रहना चाहिए । नई नई चीजों को सीखते रहना चाहिए । हर दिन एक नए इंसान के रूप में खुद को परिष्कृत करते रहना चाहिए और यही हम सबका अंतिम ध्येय भी होना चाहिए ।
एक अजनवी वीरान इस शहर में पल दो पल जी लेने का बहाना ढूँढता है, तन्हाइयों का आलम छंट जाए दिल से जरा, इसलिए हर सूरत में दोस्ती का खजाना ढूंढता है. यादों के झरोखों से झांककर देखा, गांवों की गलियों में गुज़री अतीत की रेखा, बहुमंजिली इमारत के बंद कमरे में बैठा आज भी वही पूराना घर का अंगना ढूंढता है. एक अजनवी वीरान इस शहर में पल दो पल जी लेने का बहाना ढूँढता है, वक्त की नज़ाकत को परख इस कदर बड़े हुए, किसी ने गले लगाया कोई था झुकाने को अड़े हुए, भुला गिले शिकवे अब शब्दों का एक प्यारा संसार रचें, इसलिए कमरे के सूनेपन में भी कोई अफ़साना ढूंढता है. एक अजनवी वीरान इस शहर में, पल दो पल जी लेने का बहाना ढूँढता है,
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