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अनुशासन का महत्त्व

अनुशासन जीवन की वह शक्ति है जो व्यक्ति को साधारण से असाधारण बना देती है। यह केवल नियमों का पालन करने की बात नहीं है, बल्कि आत्म-नियंत्रण, धैर्य और निरंतरता का प्रतीक है। अनुशासन से ही व्यक्ति अपने लक्ष्यों तक पहुँचता है और समाज में व्यवस्था बनाए रखता है। एक छात्र का उदाहरण लें। यदि वह रोज़ाना समय पर पढ़ाई करता है, तो परीक्षा के समय उसे घबराहट नहीं होती। उसकी तैयारी व्यवस्थित होती है और परिणाम भी अच्छे आते हैं। इसके विपरीत, जो छात्र बिना अनुशासन के पढ़ाई करता है, उसे अंतिम समय में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। यही अनुशासन का अंतर है। पेशेवर जीवन में अनुशासन का महत्व और भी बढ़ जाता है। कार्यस्थल पर समय पर पहुँचना, कार्य को निर्धारित समय में पूरा करना और टीम के साथ सहयोग करना अनुशासन का ही हिस्सा है। महेंद्र सिंह धोनी का जीवन इसका उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने अपने अनुशासन और धैर्य से भारतीय क्रिकेट टीम को कई बार जीत दिलाई। मैदान पर शांत रहना और कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेना उनके अनुशासन का ही परिणाम था। व्यक्तिगत जीवन में भी अनुशासन का महत्व कम नहीं है। स्वास्थ्य के क्षेत्र मे...
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How to develop good habits ?

  Building good habits can significantly improve various aspects of your life, from productivity to health and well-being. Here are some tips to help you successfully establish and maintain good habits: 1.      Start Small: Begin with tiny, manageable changes. This reduces the initial resistance and makes the habit feel more achievable. Once the small habit is firmly established, you can gradually increase its complexity or duration. 2.      Set Clear Goals: Define your goals and the purpose behind the habit. Having a clear understanding of why you want to develop a specific habit can provide motivation and direction. 3.      Be Consistent: Consistency is key to habit formation. Try to perform the habit at the same time, in the same context, or triggered by a specific event. Consistency helps your brain associate the behavior with a particular cue, making it more likely to become automatic. 4.    ...

क्या आप भी जीवन में अटका हुआ महसूस कर रहे हैं ? आज़माएँ ये टिप्स ।

कभी-कभी आप जीवन में अटका हुआ महसूस करते हैं । एकरसता के जंजीरों में उलझ जाते हैं । उस समय परिवर्तन , विकास और एक ऐसी सफलता की चाहत मन में होती है जो हमारी थकी हुई आत्माओं में नई जान फूंक सके । जब आप जीवन में अटका हुआ महसूस करें तो उस वक्त इन पांच रणनीतियों का उपयोग कर सकते हैं जो आपको इस अटकाव को दूर कर जीवन को गति देने में मदद कर सकता है । 1. अपनी धारणाओं को चुनौती दें जब आप खुद को फंसा हुआ महसूस करते हैं तो सबसे पहले आपको अपनी धारणाओं को चुनौती देना पड़ेगा । अपने मन में बनी धारणाओं से परे विचार करना होगा । पुरानी धारणाओं के जकड़न को तोड़ना होगा । अपने मन को नए तरीके से सोचने के लिए स्वतंत्र करना पड़ेगा । तभी जीवन में आगे की राह खुल सकेगी । 2. अपनी सबसे खराब स्थिति के बारे में खुद से बात करें यदि आपको डर है कि सबसे बुरा घटित हो सकता है , तो आप स्वयं निर्णय लें कि आप क्या करेंगे। आप इसे कैसे संभालेंगे ? क्या आप जीवित रह सकेंगे ? यदि उत्तर हां है , तो आप सबसे खराब स्थिति के डर से खुद को मुक्त कर लेंगे - और आगे बढ़ेंगे। उदासी  3. साहस के बारे में जानें बहादुर बनना आसान न...

सीख

हमें हरदम हर पल कुछ न कुछ सीखते रहना चाहिए । जिस दिन सीखने का क्रम टूट जाता है उसी दिन से हमारे जीवन का उत्थान रुक जाता है । प्रकृति का नियम है कि संसार में सभी चीजों का पहले उद्गम फिर उत्थान और अंत में पतन होता है । परंतु, यह केवल भौतिक अथवा शारीरिक रूपों पर लागू होता है और मनुष्य का एक अद्वितीय पहलू है इसकी बौद्धिकता । मनुष्य की बौद्धिकता में यह नियम कतई लागू नहीं होता है । मनुष्य बौद्धिक रूप से निरंतर जीवनपर्यंत अपना उत्थान करते रह सकता है । अतः हमें सदैव स्वयं को परिष्कृत करते रहना चाहिए । नई नई चीजों को सीखते रहना चाहिए । हर दिन एक नए इंसान के रूप में खुद को परिष्कृत करते रहना चाहिए और यही हम सबका अंतिम ध्येय भी होना चाहिए । 

नव वर्ष 2018 के मेरे 10 रिजॉल्यूशन

नव वर्ष के आगमन पूर्व एक सप्ताह तक लोग इस बात को लेकर काफी कसमकश में रहते हैं कि आखिरकार नए वर्ष का रिजॉल्यूशन क्या होगा। इस क्रम में हम संकल्पों की एक लंबी सूची तैयार कर लेते हैं , जिसमें सपने , इरादे , मंसूबे के अलावे कई ऐसी चीजें भी शामिल होती है जो हमें आगे बढ़ने से रोकती हैं और हम हर हाल में उनसे निजात पाना चाहते हैं। इसमें हम कई ऐसे कठिन संकल्पों की भी सूची तैयार कर लेते हैं जो सप्ताह दो सप्ताह के बाद अथवा जनवरी के अंत तक लगभग अपनी अचेतावस्था में पहुँच जाते हैं और अंतत उससे हम पीछा छुड़ा ही लेते हैं। ऐसा लगभग हम सभी के साथ होता है। इसी लिए नव वर्ष के लिए संकल्पों की सूची बहुत सोच विचार कर तैयार करें और कोशिश इस बात की करें कि सूची में शामिल संकल्प छोटे ही क्यों न हो , मगर वर्ष के अंत तक उसके साथ चिपके रहे , यही आपको आवश्यक सफलता दिलाएगी। एक गहन आत्मा-निरीक्षण के पश्चात मैंने भी वर्ष 2018 के लिए कुछ रिजॉल्यूशन लिया है जिसकी संक्षिप्त लिस्ट आगे दे रहा हूँ। हालांकि सूची मेरी बहुत छोटी है , लेकिन मेरा भरसक प्रयास रहेगा कि वर्ष के अंत तक इसके साथ मैं पूरी तन्मयता से चिपका ...

वर्ष 2017 फ्लैश बैक

समय एक बहती हुई नदी की धारा के समान है। यह सिर्फ आगे बढ़ना जानता है ,   पीछे मुड़कर देखना इसकी फितरत में नहीं है। हममें से कई लोग समय - वेग के साथ आगे बढ़ना सीख लेते हैं और अपने जीवन में नित नई बुलंदियों को छूते जाते हैं ,   मगर कुछ लोग समय के पीछे पीछे उसका अनुकरण करते हुए चलते हैं और जीवन में सीमित सफलता ही प्राप्त कर पाते हैं, जबकि कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो जाने अनजाने में समय की चाल के विपरीत चलने लगते हैं और अपने जीवन में असफलता ,   निराशा ,   कुंठा और हताशा का ही वरन करते हैं। तो यह पूरी तरह आप पर निर्भर करता है की समय की चाल को आप किस तरह ग्रहण करते हैं। इसकी निरंतर आगे बढ़ती हुई चाल में आप कदम से कदम मिलाकर चल पाते हैं अथवा नहीं। मैं समय का सच्चा पारखी होने का दावा तो नहीं कर सकता हूँ परंतु समय की चाल के साथ पूरी तरह कदमताल करने का प्रयास अवश्य करता हूँ। इस क्रम में कभी सफल होता हूँ तो कभी असफल, मगर हार नहीं मानता क्योंकी जिस प्रकार पीछे मुड़कर देखना समय की फितरत में नहीं है उसी प्रकार हार मानना मेरी फितरत में नहीं हैं। अगर मैं 2017 पर सरसराती नजर ड...

अपना फ़र्ज

अपना फ़र्ज &&& @@@@ वसंत कुंज सोसाइटी में कृष्णजन्माष्टमी के अवसर पर एक भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया था। जिसमें मशहूर गायक अभिनव चंचल आ रहे थे। हर जगह उनका पोस्टर लगा दिया गया था। अभिनव चंचल गायन के क्षेत्र में एक नामी गरामी हस्ती माना जाता है। भक्ति संगीत के साथ साथ उन्होंने बॉलीवुड के कई प्रसिद्ध फिल्मी गानों में भी अपना स्वर दे चुका है। एक ओर युवावर्ग उनके फिल्मी गानों के मुरीद हैं तो वहीं दूसरी ओर उनके धार्मिक गीतों और भजनों ने वैसे लोगों को मंत्र – मुग्ध कर रखा है , जो जरा आध्यात्मिक किस्म के हैं। इसमें बच्चे से लेकर वृद्ध वर्ग तक के लोग शामिल हैं ।  रत्नावली आज तड़के सुबह उठ गई और नहा धोकर पूजा में बैठ गई । दामोदर प्रसाद को भी नींद नहीं आ रही थी किंतु, फिर भी बिस्तर पकड़े हुए थे । दो-चार दिनों से उनके घुटनों का दर्द जरा बढ़-सा गया था, और अन्दर ही अन्दर हल्की कंपकपी का अनुभव हो रहा था । थोड़ा चल फिर लेता तो सांस फूलने लगती । इसकी वजह कोई खास बीमारी तो नहीं थी किंतु, सबसे बड़ी बीमारी उसका बुढ़ापा था । दामोदर प्रसाद बहत्तर साल के हो चुके हैं, ज...